कुमार सुशांतः बाप नेता बच्चे अभिनेता
हाल में सलमान ख़ान और सोनाक्षी सिन्हा की फिल्म दबंग ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा धमाल मचाया कि आमिर ख़ान की फिल्म थ्री इडियट्स भी पीछे छूट गई. फिल्म में सोनाक्षी के अभिनय को इस क़दर सराहा गया कि अरबाज़ ख़ान ने सोनाक्षी को लेकर इसका सीक्वल बनाने की ठान ली. सोनाक्षी बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी हैं. शत्रुघ्न सिन्हा अपनी बेटी की इस सफलता से का़फी गदगद हुए. उधर पूर्व रेल मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने भी फिल्मों की ओर अपने क़दम बढ़ा दिए हैं. अपने बेटे की इस उपलब्धि से रामविलास पासवान खासे उत्साहित हैं और होना भी चाहिए. दरअसल, बिहार में इन दिनों ऐसी हवा चली है कि दिग्गज राजनीतिज्ञोंके बेटे-बेटियां पिता की सियासी दुनिया को छोड़कर फिल्मी दुनिया में अपना करियर बना रहे हैं. केवल सोनाक्षी सिन्हा और चिराग पासवान ही नहीं, बल्कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जो पिता की राजनीतिक राह से दूर बॉलीवुड में क़दम रख चुके हैं. शेखर सुमन को दुनिया फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों में काम करने वाले एक कलाकार के रूप में जानती थी, लेकिन शेखर सुमन का राजनीतिक चेहरा तब उभर कर सामने आया, जब 2009 के लोकसभा चुनाव में पटना साहिब संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा के मुक़ाबले कांग्रेस ने उन्हें टिकट दे डाला. शेखर सुमन ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव जीत गए. दोनों नेताओं के बीच जीत-हार का सिलसिला यही ख़त्म नहीं हुआ. इस चुनाव के बाद दोनों के बच्चों के बीच जंग छिड़ गई. जहां शेखर के बेटे अध्ययन सुमन ने तीन फिल्मों जश्न, राज़ और हाल-ए-दिल में अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी सोनाक्षी सिन्हा ने दबंग में दमदार अभिनय करके विरोधियों को जवाब देते हुए अपने पिता की प्रतिष्ठा में बढ़ोत्तरी की.
इतना ही नहीं, प्रकाश झा को बिहार के लोग राजनीतिक शख्सियत के रूप में भी जानते हैं. उन्होंने अपनी पहुंच के दम पर 2004 में चंपारण से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. फिर 2009 के संसदीय चुनाव में वह पश्चिमी चंपारण से मैदान में उतरे, मगर इस बार भी भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया. प्रकाश झा अभी भी राजनीति में अपना भाग्य आजमा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर उनकी 18 वर्षीय बेटी दिशा झा गायिका बनने की तैयारी कर रही हैं. बॉलीवुड और राजनीति में प्रकाश झा के कद को देखते हुए यही लगता है कि दिशा के लिए गायिका बनने की राह ज़्यादा मुश्किल नहीं है. बिहार में राजनेता अपने विरोधियों को मात देने की जुगत में रहते हैं, लेकिन उनके बच्चे कांटे भरी राजनीतिक राह से अलग हटकर प्रसिद्धि हासिल करने के लिए मेहनत कर रहे हैं. यह बात अलग है कि उनकी राह को आसान बनाने में उनके पिता की पहुंच और पैसे की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. जो भी हो, बिहार के लिए तो यह एक अच्छा संकेत है.
बिहार के सियासी समाज के बीच एक नई प्रथा चली है. कई दिग्गज नेता अपने बेटे-बेटियों को बॉलीवुड में भेज रहे हैं या यूं कहें कि बच्चे ही अपने पिता की राजनीतिक दुनिया से दूर रहना और रुपहले पर्दे के हीरो-हीरोइन बनना चाहते हैं. बिहार के कई दिग्गज नेताओं के बच्चे बॉलीवुड की ओर रु़ख कर चुके हैं.हाल में बिहार में नेहा शर्मा भी का़फी चर्चा में रहीं. नेहा ने फिल्म क्रूक्स में इमरान हाशमी की हीरोइन बनकर यह साबित कर दिया कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है. सबसे रोचक बात यह है कि नेहा के पिता अजीत शर्मा इस बार भागलपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. अजीत शर्मा यूं तो पुराने कांग्रेसी रहे हैं, पैसों के मामले में धनी भी हैं. वह कई बार कांग्रेस की टिकट पर बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. 2009 में जब कांग्रेस ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया तो उन्होंने मायावती यानी बसपा का दामन थाम लिया. एक बार फिर कांग्रेस ने उन पर यक़ीन किया है. बिहार के सियासी समाज में राजनेताओं के बेटे-बेटियों के बीच इस तरह की टक्कर कोई नई बात नहीं है. पूर्व रेलमंत्री रामविलास पासवान यूपीए गठबंधन से नाता तोड़ने के बाद केंद्रीय स्तर पर भले ही फ्लॉप चल रहे हों, लेकिन बिहार में उनकी लोकप्रियता कम नहीं है. इसी का नतीजा है कि कांग्रेस को केंद्रीय स्तर पर लोजपा से नाता तोड़ने पर अफसोस भले ही न होता हो, पर उसे बिहार के चुनाव में राजद या लोजपा जैसी पार्टी का सहारा लेना ही पड़ता है. मजे की बात तो यह है कि रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान फिल्म वन एंड ऑनली के हीरो बन गए हैं. तनवीर ख़ान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में चिराग के साथ कंगना रानावत नज़र आएंगी. दूसरी ओर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव क्रिकेट में अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं.
इतना ही नहीं, प्रकाश झा को बिहार के लोग राजनीतिक शख्सियत के रूप में भी जानते हैं. उन्होंने अपनी पहुंच के दम पर 2004 में चंपारण से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. फिर 2009 के संसदीय चुनाव में वह पश्चिमी चंपारण से मैदान में उतरे, मगर इस बार भी भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया. प्रकाश झा अभी भी राजनीति में अपना भाग्य आजमा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर उनकी 18 वर्षीय बेटी दिशा झा गायिका बनने की तैयारी कर रही हैं. बॉलीवुड और राजनीति में प्रकाश झा के कद को देखते हुए यही लगता है कि दिशा के लिए गायिका बनने की राह ज़्यादा मुश्किल नहीं है. बिहार में राजनेता अपने विरोधियों को मात देने की जुगत में रहते हैं, लेकिन उनके बच्चे कांटे भरी राजनीतिक राह से अलग हटकर प्रसिद्धि हासिल करने के लिए मेहनत कर रहे हैं. यह बात अलग है कि उनकी राह को आसान बनाने में उनके पिता की पहुंच और पैसे की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. जो भी हो, बिहार के लिए तो यह एक अच्छा संकेत है.
कुमार सुशांतः बाप नेता बच्चे अभिनेता
Reviewed by kumar sushant
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8:55 PM
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