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ये ब्लॉग कुमार सुशांत के लेख पर आधारित है।

कुमार सुशांतः नेहा के पापा की चुनावी जंग

कहते हैं कि अगर एक बार जिस पर राजनीति और नेतागिरी का नशा च़ढ जाए फिर तो उतारे नहीं उतरता.  सत्ता और कुर्सी पर नज़र  कुछ यूं टिक जाती है कि फिर सारे नज़ारे धुंधले प़ड जाते हैं. उस  पर लक्ष्मी भी मेहरबान हो तो कहने ही क्या. आप भी राजनीति के नशे में सराबोर ऐसे बहुत से नेताओं को जानते होंगे. लेकिन भागलपुर विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार अजीत शर्मा की बात कुछ जुदा-जुदा सी है. इन पर यह नशा कुछ ज़्यादा ही सर च़ढकर बोल रहा है. अजीत शर्मा चार बार विधायक और एक बार सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं. एक बार ज्योतिष ने तो शर्मा जी को यहां तक कह दिया कि आप चुनाव क्यूं लड़ते हैं, आपके हाथ की लकीरों में सांसद क्या, विधायक बनना भी नहीं लिखा है. लेकिन शर्मा जी हैं कि हर विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ते हैं और रुपया राशन-पानी की तरह ख़र्च करते हैं. लेकिन इस बार के चुनाव में शर्माजी की बेटी नेहा शर्मा ग्लैमर का त़डका लगा रही हैं. चुनाव के ऐन मौक़े पर उनकी बेटी नेहा शर्मा की फिल्म क्रुक रिलीज़ हुई. महेश भट्ट की इस फिल्म में नेहा के साथ इमरान हाशमी नज़र आ रहे हैं.
अजीत शर्मा से ज़िले के बहुत से कांग्रेसी नाराज़ हैं. वह कुछ कांग्रेसियों को मनाने की जुगत में हैं तो कुछ को बस दुआ-सलाम करके अपना काम चला रहे हैं.
ज़ाहिर है इस ग्लैमर कनेक्शन का लाभ तो शर्माजी को मिलना ही था. अजीत शर्मा पहली बार कांग्रेस की टिकट से 1990 में बिहपुर विधासभा से चुनाव लड़े और हार गए. 2005 में फरवरी में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आलाकमान ने अजीत शर्मा को बिहपुर से टिकट देने से मना कर दिया, तो शर्मा जी ने भागलपुर से टिकट की मांग कर दी. पैसे की ताक़त और संबंधी रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामजतन सिन्हा का कमाल था कि उन्हें भागलपुर से टिकट मिल गया. लेकिन उनके हारने के रिकॉर्ड को देखते हुए  कांग्रेस ने 2005 के नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट देने से मना कर दिया. शर्मा जी तुरंत कांग्रेस का हाथ छोड़कर हाथी पर सवार हो गए. विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर संसदीय क्षेत्र से बसपा से चुनाव लड़ा. संसदीय चुनाव में भी वही हुआ जो हर बार होता आया था, वो फिर हार गए. जहां विजयी उम्मीदवार भाजपा के शाहनबाज़ हुसैन को ढाई लाख से अधिक वोट मिले, वहीं इनको केवल छह हज़ार के आसपास वोट मिले.
शर्माजी की इस आयाराम गयाराम वाली हरकत को देखकर सबको यही लग रहा था कि उन्हें इस बार कांग्रेस में जगह नहीं मिलेगी. लेकिन इस बार कांग्रेस ने भागलपुर विधानसभा से टिकट तक दे डाला. टिकट किस आधार पर मिला, यह किसी को नहीं मालूम. वहीं भागलपुर में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि बेटी नेहा शर्मा की पैरवी से ही अजीत शर्मा टिकट पाने में भी सक्षम हुए हैं. बहरहाल, अजीत शर्मा ज़ोर-शोर से चुनावी तैयारी में जुटे हुए हैं. हर बार की तरह इस बार भी अजीत शर्मा गली-गली जाकर लोगों से वोट की अपील कर रहे हैं. कांग्रेसियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और वोटरों को यही यकीन दिला रहे हैं कि मैं ही आपका अजीत शर्मा हूं. शर्मा जी से उनकी जीत के बारे में पूछने पर वो पिछले चुनावों में मिले वोट का ब्यौरा देना शुरू कर देते हैं. इस बार भी अपनी जीत को सुनिश्चित बताते हुए बेटी नेहा के चुनाव प्रचार में आने संबंधी बात को अ़फवाह करार देते हैं.
अजीत शर्मा से ज़िले के बहुत से कांग्रेसी नाराज़ हैं. शर्मा जी कुछ कांग्रेसियों को मनाने की जुगत में हैं, तो कुछ को बस दुआ सलाम कर अपना काम चला रहे हैं. वह अपने घर पर ही पार्टी का दफ्तर खोल चुके हैं. इस बार भी कार्यकर्ताओं के लिए धन द्वार खोल चुके हैं. विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की बात होते ही सबकी ज़ुबान पर एक ही चर्चा होती है, क्या चुनाव के अंतिम दौर में नेहा पापा के चुनाव प्रचार में आएंगी? वैसे अजीत शर्मा को टिकट मिलने से भाजपा प्रत्याशी अश्विनी चौबे भी मन ही मन गदगद हैं.
http://www.chauthiduniya.com/2010/10/neha-ke-papa-ki-chunawi-jang.html

कुमार सुशांतः नेहा के पापा की चुनावी जंग कुमार सुशांतः नेहा के पापा की चुनावी जंग Reviewed by kumar sushant on 8:57 PM Rating: 5

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