कुमार सुशांतः सचिन को सलाम
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच केपटाउन में हुआ तीसरा टेस्ट मैच. सचिन तेंदुलकर हाफ सेंचुरी पूरा कर क्रीज पर पांव जमा चुके थे. दक्षिण अफ्रीका के कप्तान ग्रैम स्मिथ की परेशानी साफ झलक रही थी. उन्हें पता था कि जब तक सचिन मैदान पर हैं, तब तक भारतीय पारी के बढ़ते स्कोर को रोक पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. सचिन का विकेट शायद तेज़ गेंदबाज़ डेन स्टेन ले सकें, इस उम्मीद के साथ स्मिथ ने स्टेन से लंबा स्पेल कराया, लेकिन एक छोर पर जमे क्रिकेट के महान बल्लेबाज़ सचिन हर गेंदबाज़ का स्वागत चौकों से कर रहे थे. देखते ही देखते सचिन 94 के स्कोर पर पहुंच गए. आख़िर में सचिन ने एक अचंभित कर देने वाला शॉट खेलकर सिक्सर जमाया और अपने टेस्ट करियर का 51वां शतक पूरा करने के बाद वह 146 रन बनाने तक गेंदबाज़ों के छक्के छुड़ाते रहे. इस तरह तीसरे टेस्ट मैच में भारतीय टीम की नैया भी डूबने से बच गई. अंतत: तीसरे दिन का खेल ख़त्म होने के बाद डेन स्टेन ने कबूल किया कि जब सचिन मैदान पर हों तो ज़रूरी है कि हम उन्हें आउट करने के लिए अपनी ऊर्जा बर्बाद न करते हुए मैदान पर खेल रहे किसी और खिलाड़ी को आउट करने में अपनी ताक़त लगाएं. स्टेन ने कहा कि सचिन जब फॉर्म में होते हैं तो उनका कोई जोड़ नहीं होता. स्टेन का यह स्वीकारना कोई नई बात नहीं. सचिन ने कई बार विपक्षी खिलाड़ियों को अपना लोहा मनवाया है. उन सबसे हटकर सचिन ने 2010 में अपना बेस्ट देकर और 2011 के शुरू में टेस्ट शतक जमाकर इस साल भी बेस्ट देने का आगाज़ कर दिया है.
बेजोड़ खिलाड़ी
भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर की मानें तो सचिन बेजोड़ खिलाड़ी हैं, उनकी तुलना किसी दूसरे खिलाड़ी से करना मूर्खता है. गावस्कर का तो यहां तक मानना है कि सचिन इस ग्रह के नहीं हैं. निस्संदेह, क्रिकेट के महान बल्लेबाज़ों की सूची में ऑस्ट्रेलिया के डोनाल्ड ब्रैडमैन का पहला नाम आता है. ब्रैडमैन के टेस्ट क्रिकेट इतिहास पर नज़र डालें तो उन्होंने 1928-48 के बीच 52 टेस्ट मैचों में 99.94 के औसत से 6,996 रन बनाए थे. वहीं सचिन ने 1989 से 2011 की शुरुआत तक 177 टेस्ट मैच खेलकर 56.54 की औसत से 14,632 रन बनाए हैं. रनों की संख्या के आधार पर अब सचिन ब्रैडमैन से काफी आगे हैं. हालांकि यह भी सही है कि प्रति पारी रन के हिसाब से सचिन ब्रैडमैन से काफी पीछे हैं. लेकिन एक सच यह भी है कि सचिन और ब्रैडमैन दो अलग-अलग युगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. ब्रैडमैन के ज़माने में क्रिकेट का स्वरूप काफी अलग था. उस वक्त न तो वन डे मैचों का धमाल था, न टी-20 जैसा दे दनादन क्रिकेट. खिलाड़ियों पर लगातार प्रदर्शन का वैसा दबाव नहीं होता था, जैसा मौजूदा दौर में होता है. आज के दौर में तो क्रिकेट के मुकाबले साल भर चलते रहते हैं. ऐसे में आपको फिट भी रहना है और देश के लिए बेहतर प्रदर्शन भी करना है. सचिन ने दो दशकों से ज़्यादा के अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में विपक्षी टीमों के छक्के छुड़ाए हैं.
स्टेन ने कहा कि सचिन जब फॉर्म में होते हैं तो उनका कोई जोड़ नहीं होता. स्टेन का यह स्वीकारना कोई नई बात नहीं. सचिन ने कई बार विपक्षी खिलाड़ियों को अपना लोहा मनवाया है. उन सबसे हटकर सचिन ने 2010 में अपना बेस्ट देकर और 2011 के शुरू में टेस्ट शतक जमाकर इस साल भी बेस्ट देने का आगाज़ कर दिया है.
2010 : सचिन नंबर वन
वर्ष 2010 में टेस्ट मैचों में सबसे ज़्यादा शतक और रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन के नाम दर्ज है. सचिन ने 2010 में 14 टेस्ट मैच खेलकर 7 शतक जमाए और 1562 रन बनाए. जबकि ज़्यादा शतक बनाने में सचिन के बाद दूसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज़ जैक कैलिस रहे, जिन्होंने 11 टेस्ट मैचों में 6 शतक लगाए. वहीं 2010 में ज़्यादा रन बनाने में दूसरे नंबर रहे वीरेंद्र सहवाग, जिन्होंने 14 टेस्ट मैचों में 1422 रन बनाए. सचिन का जलवा केवल टेस्ट में ही नहीं, वन डे मैचों में भी चला. सचिन ने 2010 में भले ही दो वन डे मैच खेले हों, लेकिन उसी में उन्होंने एक ऐसी पारी खेली, जो वन डे इतिहास में आज तक किसी ने नहीं खेली थी. सचिन दक्षिण अफ्रीका के ख़िला़फ 24 फरवरी को ग्वालियर वन डे मैच में 200 रनों की नाबाद पारी खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज़ बन गए. सचिन की इस ऐतिहासिक बल्लेबाज़ी को पूरी दुनिया ने सम्मान दिया. अमेरिकी पत्रिका टाइम ने सचिन के इस शतक को 2010 के दस यादगार लम्हों में शामिल कर लिया.
सबसे अलग
व्यक्तिगत तौर पर भी सचिन दूसरे खिलाड़ियों से काफी हटकर हैं. विदेशी खिलाड़ियों की छोड़िए, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों में कई ऐसे हैं, जिनका कभी किसी लड़की के साथ प्रेम प्रसंग उजागर होता है तो कभी वे कोई किसी रियलिटी शो में मौजमस्ती करते नज़र आते हैं. युवराज सिंह, हरभजन सिंह एवं एस श्रीसंथ इसके जीते-जागते उदाहरण हैं. शादी से पहले महेंद्र सिंह धोनी भी ऐसी खबरों की चपेट में आ चुके हैं. लेकिन सचिन का अपना एक अलग व्यक्तित्व है. उनमें एक ऐसी गंभीरता है, जो करोड़ों लोगों का आदर्श बनने के लिए काफी है.
सचिन ने 1989 में जब अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी तो भारत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के निचले पायदान पर था, लेकिन आज आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में भारत नंबर वन के पायदान पर काबिज़ है और वन डे में वह टॉप थ्री में शामिल है. इसका श्रेय सचिन तेंदुलकर को जाता है. सचिन की इसी जादूगरी को देखते हुए प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर उन्हें अपना बेटा कहने से ख़ुद को नहीं रोक सकीं. इतना ही नहीं, बीते साल के अंत में हुए कांग्रेस महाधिवेशन में केंद्रीय मंत्रियों ने मीडिया कवरेज पाने के लिए सचिन को भारत रत्न देने की मांग करके खूब वाहवाही बटोरी. आज के दौर में सचमुच सचिन क्रिकेट के भगवान हैं. बल्ले के जादूगर और क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन रमेश तेंदुलकर को हमारा सलाम.
आंकड़ों की नज़र से
टेस्ट वन डे
मैच 177 442
रन 14,632 17,594
बैटिंग औसत 56.54 45.12
शतक 51 46
अर्धशतक 59 93
टॉप स्कोर 248* 200*
विकेट 44 154
http://www.chauthiduniya.com/2011/01/sachin-ko-salam.html
कुमार सुशांतः सचिन को सलाम
Reviewed by kumar sushant
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8:42 PM
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