JOIN THE TEAM

ये ब्लॉग कुमार सुशांत के लेख पर आधारित है।

कुमार सुशांतः शिरडी साई भक्‍तों का महातीर्थ है

यूं तो साई बाबा को शरीर त्यागे सालों बीत चुके हैं, लेकिन वह आज भी अपने भक्तों के कल्याण के लिए किसी न किसी रूप में विद्यमान हैं. शिरडी के साई बाबा अनगिनत लोगों के आराध्य बन चुके हैं. उसकी एक ख़ास वजह है कि हम चाहे जितनी भी समस्याएं, शंकाएं या कष्ट लेकर शिरडी में बाबा के चरणों में अपना सिर झुकाएं, बाबा उन सबका एक पल में निवारण करते हैं. शिरडी के साई बाबा चमत्कारी इसलिए माने जाते हैं, क्योंकि उनकी दिव्य शक्ति के प्रताप से ही शिरडी का निर्माण हुआ. परिणामस्वरूप, साई भक्तों के लिए शिरडी आज महातीर्थ बन गया है. ऐसा माना जाता है कि वर्ष 1854 में साई बाबा जब पहली बार शिरडी आए, तब वह केवल 16 वर्ष के थे. स्वस्थ, तेजस्वी, अति सुंदर रूप लिए वह बालक हमेशा नीम के पेड़ के नीचे प्रार्थना में लीन रहता था. आसपास के लोग उस असाधारण साधक को देखकर आश्चर्य में थे, क्योंकि वह न तो किसी से बात करता था, न किसी के घर जाता था, न उसे मौसम के बदलाव की फिक्र थी और न किसी का भय था. बालक के चेहरे पर अद्भुत तेज देखकर सभी आकर्षित हो जाते थे. एक दिन अचानक लोगों ने सुबह उठकर देखा तो वह बालक वहां नहीं था. सभी लोग मन ही मन उसे ईश्वर का अवतार मानने लगे. उस असाधारण बालक को ख़ूब ढूंढा गया, लेकिन वह नहीं मिला. कई सालों बाद वह योगी साधक फिर शिरडी पहुंचता है. बालक बड़ा तो हो गया था, लेकिन उसे देखते ही लोगों ने तुरंत पहचान लिया. वह असाधारण प्रतीत होने वाला योगी एक फकीर की वेशभूषा में था. खंडोबा के मंदिर के पास आते ही पुजारी महालसापति ने उस फकीर का जब आओ साई कहकर स्वागत किया, तबसे वह साई बाबा के नाम से मशहूर हो गए. उसके बाद साई बाबा हमेशा के लिए शिरडी में ही बस गए. हर दिन बाबा भिक्षा मांगने निकलते थे और बड़ी सादगी के साथ रहते थे. बाबा के पास लोग अपने कष्ट लेकर आते थे, शंकाएं लेकर आते थे और कोमल हृदय बाबा दिन भर सबका समाधान करते नज़र आते थे. धीरे-धीरे बाबा के भक्त बढ़ने लगे. सबका विश्वास अटूट होता चला गया. कई भक्तों का कहना था कि बाबा में उन्हें सभी देवी-देवताओं के रूप नज़र आते हैं. बाबा ने हमेशा कहा कि सबका मालिक एक है, लड़ना-झगड़ना छोड़ो, मिलकर चलो, असीम सुख पाओगे. बाबा अक्सर कहते थे, किसी से ईर्ष्या मत करो, अगर कोई तुमसे जले तो उससे हंसकर मिलो. ऐसा करने से तुम बुराई पर अच्छाई की पताका फहरा सकते हो.
साई बाबा एक हिंदू द्वारा बनवाई गई मस्ज़िद में रहते थे, जिसे वह द्वारकामाई कहते थे. एक दिन साई बाबा ने अपनी अनन्य भक्त लक्ष्मीबाई शिंदे को 9 सिक्के देकर आशीर्वाद दिया और कहा कि मुझे मस्ज़िद में अब अच्छा नहीं लगता है, इसलिए मुझे बूटी साहब के पत्थर भवन में ले चलो. विक्रम संवत 1975 की विजयादशमी के दिन साई बाबा ने महासमाधि ली. महासमाधि के बाद वह पत्थर भवन बाबा का समाधि स्थल बन गया. साई बाबा पहले से कहते थे कि उनका शरीर जब इस धरती पर नहीं रहेगा, तब उनकी समाधि भक्तों को संरक्षण प्रदान करेगी. बाबा के उसी वचन का प्रमाण है कि आज भी उनके समाधि स्थल से कोई भक्त निराश होकर नहीं लौटता.

श्री सद्गुरुसाई बाबा के ग्यारह वचन

1. जो शिरडी आएगा, आपद दूर भगाएगा.
2. च़ढे समाधि की सी़ढी पर, पैर तले दुख की पी़ढी पर.
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा.
4. मन में रखना दॄढ विश्वास, करे समाधि पूरी आस.
5. मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो, सत्य पहचानो.
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए.
7. जैसा भाव रहा जिस मन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का.
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा.
9. आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वह नहीं है दूर.
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया.
11. धन्य धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य.


कुमार सुशांतः शिरडी साई भक्‍तों का महातीर्थ है कुमार सुशांतः शिरडी साई भक्‍तों का महातीर्थ है Reviewed by kumar sushant on 10:00 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.