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ये ब्लॉग कुमार सुशांत के लेख पर आधारित है।

कुमार सुशांतः साई सच्‍चे सदगुरू

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काको लागू पाय, बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय. संत कवि कबीर के इस दोहे से मालूम पड़ता है कि गुरु का हमारे जीवन में कितना अधिक महत्व है. एक ऐसा गुरु,जिसके दर पर सारे कष्टों का निवारण होता है, जो हमारी फरियाद सुनता है और आंसू पोछता है, वह सद्गुरु कोई और नहीं, बल्कि साई बाबा हैं. गुरु शब्द पर गौर करें तो गु का अर्थ होता है अंधकार और रु का अर्थ होता है नाश करने वाला. अर्थात जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए, वही सच्चा गुरु है. साई बाबा ऐसे ही सद्गुरुहैं, जिनका जीवन लोक कल्याण के कामों में शिरडी में बीता. साई बाबा ने सबसे बड़ी शिक्षा यह दी कि जाति, धर्म, समुदाय जैसे बेकार के सांसारिक विषयों में समय न गंवा कर हमें मानवता के काम में लगना चाहिए. साई बाबा सभी को मतभेद भुलाकर सद्भावना और स्नेह से जीवनयापन की शिक्षा देते हैं. साई बाबा मानते हैं कि सबका मालिक एक है और वह शक्ति एक ही है, जिसके सामने सब सिर झुकाते हैं. बाबा हमेशा श्रद्धा, विश्वास और सबूरी अर्थात सब्र के साथ रहने का संदेश देते हैं. अपने जीवन में लोग अलग-अलग तरीक़े से पूजा करते हैं, लेकिन साई बाबा कहते हैं कि असली पूजा तब होती है, जब हम ग़रीबों और लाचारों की मदद करते हैं. साथ ही अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करते हैं. साई बताते हैं कि अगर हम दैनिक जीवन में इतने कार्य शामिल करते हैं तो इससे बड़ी पूजा और कोई नहीं है.
साई बाबा ही ऐसे सदगुरू हैं, जो अपने भक्तों को हर सुख-दु:ख में मदद करते हैं. इतना ही नहीं, साक्ष्य भी हैं कि गहरी मुसीबत में साई बाबा ने अपने अनुयायियों को दर्शन भी दिए हैं.
साई बाबा ही ऐसे सद्गुरु हैं, जो अपने भक्तों को हर सुख-दु:ख में मदद करते हैं. इतना ही नहीं, साक्ष्य भी हैं कि गहरी मुसीबत में साई बाबा ने अपने अनुयायियों को दर्शन भी दिए हैं. दिल्ली के वसंत कुंज में मनोज जायसवाल रहते हैं. मनोज बताते हैं कि वह एचसीएल कंपनी में काम करते थे, लेकिन हाल में ही उनकी नौकरी छूट गई. मनोज कहते हैं कि उन्हें साई बाबा पर गहरा विश्वास है, इसीलिए वह अक्सर बाबा से मन ही मन इसके लिए प्रार्थना भी करते थे. एक दिन मनोज निराश हो गए, क्योंकि उन्हें नौकरी मिलने में परेशानियां आ रही थीं. मनोज इंटरव्यू देकर आए और भूखे पेट सो गए. मनोज ने मुसीबतों से तंग आकर अब न खाने का ़फैसला कर लिया. दूसरे दिन सोए हुए मनोज के कान में एक आवाज़ आई, जैसे उन्हें कोई साई मंदिर बुला रहा हो. मनोज तुरंत उठे और इधर-उधर देखने लगे. वह तुरंत पास के ही साई मंदिर में पहुंचे. वहां प्रसाद बंट रहा था. मनोज को एक बूढ़े व्यक्ति ने आकर पूड़ी-सब्जी दी और कहा कि खा लो बेटा, प्रसाद है. मनोज जब तक साई की महिमा को समझ पाते, वह बूढ़ा व्यक्ति वहां से चला गया. मनोज की आंखें भर आईं. मनोज घंटों साई मंदिर में बैठे और रोते रहे. इतने में मनोज के मोबाइल पर अगले दिन इंटरव्यू की सूचना आती है. मनोज अगले दिन जाते हैं और अच्छे वेतन पर उनकी नौकरी भी लग जाती है. इस सच्ची घटना से यही शिक्षा मिलती है कि साई ऐसे सच्चे सद्गुरु हैं, जो हर पल अपने भक्तों के साथ रहते हैं, उनकी फरियाद सुनते हैं और ज़रूरत पड़ने पर दर्शन भी देते हैं.
http://www.chauthiduniya.com/2010/07/sai-sachche-sadguru.html

कुमार सुशांतः साई सच्‍चे सदगुरू कुमार सुशांतः साई सच्‍चे सदगुरू Reviewed by kumar sushant on 10:53 PM Rating: 5

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